श्रीबनराज निकुंज में, पिय प्यारी सुख दैन ।
षटऋतु सहचरी बपु धरे, सेवत हैं दिन रैन॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, होरी के कवित्त (11)
श्री वृन्दावन के निकुंजों में पिय-प्यारी को सुख प्रदान करने के लिए ही छहों ऋतुएँ सहचरी रूप धारण करके दिन-रात उनकी सेवा में उपस्थित रहती हैं।
षटऋतु सहचरी बपु धरे, सेवत हैं दिन रैन॥
- श्री लाल बलबीर, ब्रज बिनोद, होरी के कवित्त (11)
श्री वृन्दावन के निकुंजों में पिय-प्यारी को सुख प्रदान करने के लिए ही छहों ऋतुएँ सहचरी रूप धारण करके दिन-रात उनकी सेवा में उपस्थित रहती हैं।

