कुंज पधारो रंग-भरी रैन - श्री बनी ठनी जी

कुंज पधारो रंग-भरी रैन - श्री बनी ठनी जी

कुंज पधारो रंग-भरी रैन ।
रंग भरी दुलहिन रँग भरे पिया श्याम सुंदर सुख दैन ।। [1]
रंग भरी सेज रची जहाँ सुंदर रंग भर्यो उलहत मैन ।
‘रसिक बिहारी’ प्यारी मिलि दोउ करौ रंग सुख-चैन ।। [2]

- श्री बनी ठनी जी

आज तो रस भरी रंगीन रात्री है, रंग भरी दुल्हन है और रंग भरे पिय श्याम सुंदर, आप दोनों मिलकर वृंदावन के कुंजों में पधारो । [1]

रंग भरी ही सेज सजायी है जहां दिव्य सुंदर रंग भर हुआ है जिसे देख कर कामदेव भी उल्लसित है । श्री बनी ठनी जी कामना करती हैं कि श्री बिहारी एवं प्यारी [श्यामा श्याम] दोनों मिल कर इस रात्री को और रंगीन बना कर सुख चैन प्राप्त करो । [2]