काम क्रोध मद लोभ की, लगी हिये में आग ।
नारायण वैराग भट, सहित ज्ञान गए भाग॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (52)
यदि मनुष्य के हृदय में काम, क्रोध, मद और लोभ की अग्नि प्रज्वलित हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि उसके भीतर का वैराग्य और ज्ञान दोनों ही नष्ट हो चुके हैं।
नारायण वैराग भट, सहित ज्ञान गए भाग॥
- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (52)
यदि मनुष्य के हृदय में काम, क्रोध, मद और लोभ की अग्नि प्रज्वलित हो जाए, तो समझ लेना चाहिए कि उसके भीतर का वैराग्य और ज्ञान दोनों ही नष्ट हो चुके हैं।

