(राग कान्हरो)
सुंदर नित्य बिहारिन वामा ।
अखिल विश्व मोहन मनमोहन निरखि होत अभिरामा ।। [1]
सकल लोक चूडामनि जाको श्री वृंदावन धामा ।
श्री दासि किसोर स्याम-मुख विलसत विलसावत श्री स्यामा ।। [2]
- श्री किशोर दास, श्री किशोर दास जी की वाणी, नेह तरंग (66)
सर्वोपरि नित्यविहारिनी ज़ू साक्षात श्री राधिका रानी अत्यंत मोहिनी हैं जिन्हें निरख कर अखिल विश्व को मोहित करने वाले, साक्षात कामदेव को भी मोह लेने वाले श्याम सुंदर भी मोहित हो जाते हैं । [1]
सकल लोक चूड़ामणि अपने नित्य धाम श्री वृंदावन धाम में सुख विलसते हैं एवं सुख स्वरूप श्री श्यामा ज़ू सुख लुटाती हैं एवं श्री किशोर दास सखी स्वरूप से श्यामा श्याम के इस रस को पान करते रहते हैं । [2]
सुंदर नित्य बिहारिन वामा ।
अखिल विश्व मोहन मनमोहन निरखि होत अभिरामा ।। [1]
सकल लोक चूडामनि जाको श्री वृंदावन धामा ।
श्री दासि किसोर स्याम-मुख विलसत विलसावत श्री स्यामा ।। [2]
- श्री किशोर दास, श्री किशोर दास जी की वाणी, नेह तरंग (66)
सर्वोपरि नित्यविहारिनी ज़ू साक्षात श्री राधिका रानी अत्यंत मोहिनी हैं जिन्हें निरख कर अखिल विश्व को मोहित करने वाले, साक्षात कामदेव को भी मोह लेने वाले श्याम सुंदर भी मोहित हो जाते हैं । [1]
सकल लोक चूड़ामणि अपने नित्य धाम श्री वृंदावन धाम में सुख विलसते हैं एवं सुख स्वरूप श्री श्यामा ज़ू सुख लुटाती हैं एवं श्री किशोर दास सखी स्वरूप से श्यामा श्याम के इस रस को पान करते रहते हैं । [2]

