मेरी गति होउ सोई महरानी।
जासु भौंह की हिलनि बिलोकत निसु दिन सारँगपानी।।
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3)
मेरी गति श्री राधिका महरानी हैं जिनकी भौंहौं की हिलनि को कृपा प्राप्त करने हेतु नित्य ही श्याम सुंदर भी निहारते रहते हैं।
जासु भौंह की हिलनि बिलोकत निसु दिन सारँगपानी।।
- श्री भारतेंदु हरिशचंद्र, भारतेंदु ग्रंथावली, कार्तिक स्नान (3)
मेरी गति श्री राधिका महरानी हैं जिनकी भौंहौं की हिलनि को कृपा प्राप्त करने हेतु नित्य ही श्याम सुंदर भी निहारते रहते हैं।

