देखौरी या मुकुट की लटकन।
रास किये निरतत राधे संग, नुपूर काँत पायल की पटकन ।। [1]
पीताम्बर छुट जात छिनहिं छिन बैजन्ती बेसर की अटकन।
सूर श्याम की या छवि ऊपर झूठो ज्ञान योग में भटकन ।। [2]
- श्री सूरदास, सूर सागर
हे सखी, श्री कृष्ण की मुकुट की लटकनी को तो निहार, कैसी शोभा देखते ही बनती है जब श्री राधा महारानी के संग नूपुर एवं पायल की पटकन कर वे दोनों रास में विभोर नृत्य कर रहे हैं । [1]
श्री सूरदास जी कहते हैं कि मन जब श्याम सुंदर की इस पीताम्बर, एवं बैजंती बेसर युक्त छवि पर अटक जाता है तो समस्त झूठे ज्ञान, योग को नयौछावर किया जा सकता है । [2]

