अब सन्तन की मण्डली, बन्दत हौं शिरनाय ।
बिना कृपा जिनकी भये, हरि-यश गाय न जाय ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
सबसे पहले मैं संतों की मण्डली को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ, क्योंकि उनकी कृपा के बिना भगवान हरि का यश-गान करना संभव ही नहीं है।
बिना कृपा जिनकी भये, हरि-यश गाय न जाय ॥
- श्री ब्रजवासीदास, ब्रज विलास
सबसे पहले मैं संतों की मण्डली को सिर झुकाकर प्रणाम करता हूँ, क्योंकि उनकी कृपा के बिना भगवान हरि का यश-गान करना संभव ही नहीं है।

