(राग विहागरौ)
राधे रूप की उज्यारी ।
बदन सुचंद नैंन रतनारे अद्भुत तन सुखसारी ।। [1]
अंग अंग छबि अमित माधुरी चंपमाल उरधारी ।
रसिक रूप नव कुंज-महल में बिहरत लाल बिहारी ।। [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (685)
राधे रूप की उज्यारी ।
बदन सुचंद नैंन रतनारे अद्भुत तन सुखसारी ।। [1]
अंग अंग छबि अमित माधुरी चंपमाल उरधारी ।
रसिक रूप नव कुंज-महल में बिहरत लाल बिहारी ।। [2]
- श्री रूप सखी, श्री रूप सखी जी की वाणी, श्रृंगार रस के पद (685)
श्री राधा रूप सौंदर्य से उज्ज्वल हैं। उनका चेहरा 'शरद पूर्णिमा' के चंद्र के समान है, नैंन रतनारे हैं, और तन सुख का सार स्वरूप है । [1]
श्री राधा के अंग अंग में अनंत माधुरी की छवि देखने को मिलती है एवं उनके उर में चंपा की माला सुशोभित है । श्री रूप सखी कहते हैं, "श्री राधिका नव कुंज महल में श्री बिहारी जी संग विहार परायण हैं"। [2]
श्री राधा के अंग अंग में अनंत माधुरी की छवि देखने को मिलती है एवं उनके उर में चंपा की माला सुशोभित है । श्री रूप सखी कहते हैं, "श्री राधिका नव कुंज महल में श्री बिहारी जी संग विहार परायण हैं"। [2]

