अब तौ करनी है यहै, वृंदावन करि बास - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (21)

अब तौ करनी है यहै, वृंदावन करि बास - श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (21)

अब तौ करनी है यहै, वृंदावन करि बास ।
जुगल चरन छवि रंग रँगि, सब तें होइ उदास॥
- श्री हित ध्रुवदास, बयालीस लीला, ख्याल हुल्लास (21)

अब तो यही सर्वोत्तम उपाय है कि श्री राधा-कृष्ण के युगल-चरणों की छवि और उनके प्रेम-रंग में अपने मन को रंगकर, संसार से उदासीन होकर, श्री वृन्दावन में सदा वास किया जाए।