गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (8)

गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे - श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (8)

(राग कालिंगड़ा धीमाताल)
गोविन्द गोविन्द गोविन्द भज रे।
आदि अनन्त सार निगमागम, जाहि नवत सुरनर मुनि अज रे॥ [1]
दंभ कपट कामादि मान मद, इन बैरिनको तुरतहि तज रे।
नारायण मन करु सतसंगति, काल ब्यालते निर्भय गज रे॥ [2]

- श्री नारायण स्वामी, ब्रज विहार, पद सिद्धान्त (8)

हे जीव, जिनका न कोई आदि है और न ही अंत, जो समस्त शास्त्रों वेदों के सार स्वरूप हैं, ऐसे गोविंद [भगवान कृष्ण] का भजन कर जिन्हें सुर, नर, मुनि एवं भगवान ब्रह्मा भी भजते हैं। [1]

श्री नारायण स्वामी कहते हैं कि अब तू दंभ, कपट, काम, मान, मद इत्यादि शत्रुओं का तुरंत त्याग कर, मन से सत्संग कर, बलवान काल इत्यादि से निर्भय होकर जीवन व्यतीत कर। [2]