जय जय राधा-नाम, वृन्दावन जार धाम, कृष्णसुख विलासेर-निधि ।
हेन राधागुणगान, ना शुनिल मोर कान, वञ्चित करिल मोरे विधि ।।
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (108)
श्रीश्रीराधानाम की जय हो, जय हो। यह श्रीराधानाम वृन्दावन-विलासी श्रीकृष्ण के सुखविलास की निधि है। यदि श्रीराधानाम-गुणगान मैंने अपने कानों से नहीं सुना, तो मुझे तो विधाता ने अभी वञ्चित [जीवन व्यर्थ] कर रखा है।
हेन राधागुणगान, ना शुनिल मोर कान, वञ्चित करिल मोरे विधि ।।
- श्री नरोत्तम दास, प्रेम भक्ति चंद्रिका (108)
श्रीश्रीराधानाम की जय हो, जय हो। यह श्रीराधानाम वृन्दावन-विलासी श्रीकृष्ण के सुखविलास की निधि है। यदि श्रीराधानाम-गुणगान मैंने अपने कानों से नहीं सुना, तो मुझे तो विधाता ने अभी वञ्चित [जीवन व्यर्थ] कर रखा है।

