श्री गर्गसंहिता के अनुसार - एक बार मुनि दुर्वासा भगवान् श्रीकृष्ण के दर्शन हेतु ब्रजभूमि में पधारे। रमणरेती में उन्होंने देखा परम चित्ताकर्षक बाल गोपाल अपने साथी गोप-बालकों के साथ वहाँ रज में लोटते, परस्पर विभिन्न प्रकार की बाल क्रीड़ाएँ कर रहे थे। दिगम्बर वेष में छोटे-छोटे बालकों के साथ नन्द नन्दन को बालोचित क्रीड़ा करते देखकर दुर्वासा जी के मन में बड़ा आश्चर्य हुआ। मन ही मन वे सोचने लगे- "क्या यह वही सच्चिदानन्द स्वरूप ईश्वर है? यह बालकों के साथ पृथ्वी पर क्यों लोट रहा है? मुझे तो यह केवल नन्द का सामान्य बालक मालूम पड़ता है, षड्ऐश्वर्य युक्त श्रीकृष्ण नहीं है।" जब मुनिवर दुर्वासा इस प्रकार मोहग्रसित हो गए तब तक बाल गोपाल उनकी दृष्टि के सम्मुख आकर हँसने लगे, हँसते हुए नंदलाल ने श्वास ली और दुर्वासा श्वास द्वारा उनके मुख में चले गए। मुख के भीतर जाकर उन्होंने साक्षात् गोलोक धाम में प्रवेश किया। वहाँ मुनि एक परम रमणीय निकुञ्ज के भीतर घुसे तो उन्हें वहाँ पर श्री राधा वल्लभ श्यामसुन्दर का दर्शन हुआ ।
उन्हें देखकर श्रीकृष्ण हँस पड़े, हँसते समय उनके श्वास से खिंचकर दुर्वासा जी भगवान् के मुख में प्रवेश कर गए और पुनः बाहर निकल आये। बाहर आने पर उन्होंने देखा वही नन्हा शिशु, जो रमणरेती की मनोहर बालुका पर बालकों के साथ क्रीड़ा कर रहा है। अब दुर्वासा जी समझ गये कि यही अनन्त ब्रह्माण्ड नायक सच्चिदानन्द प्रभु हैं। फिर तो दुर्वासा जी हाथ जोड़कर श्री कृष्ण की स्तुति करने लगे।
यहाँ की बहुत सी कथाएँ हैं। यहाँ भगवदीय आसकरन जी को एक ऐसी होली लीला के दर्शन हुए थे, जिसको देखकर वे 3 दिन तक वहीं बेसुध खड़े रहे, वह होली अत्यन्त प्रसिद्ध है। राजा आसकरन जी बल्लभ सम्प्रदाय के अत्यन्त प्रसिद्ध भक्त हुए हैं। रमणरेती केवल बाललीला का ही स्थल नहीं है, यह श्रृंगार लीला का भी स्थल है किन्तु यह बात कम लोग जानते हैं।
जहां आज भी जो जन यहाँ आते हैं वह इस रज में लोटते हैं एवं यह दृश बड़ा ही मनमोहक है । यहाँ साथ ही में रमन बिहारी, रमन कुंड और रसखान समाधि भी पास में ही है ।
स्थान:
यह स्थान गोकुल में स्थित है जिसे रमन रेती गोकुल के नाम से जाना जाता है । यह वृंदावन से क़रीब 4o किमी की दूरी पर है ।
जहां आज भी जो जन यहाँ आते हैं वह इस रज में लोटते हैं एवं यह दृश बड़ा ही मनमोहक है । यहाँ साथ ही में रमन बिहारी, रमन कुंड और रसखान समाधि भी पास में ही है ।
स्थान:
यह स्थान गोकुल में स्थित है जिसे रमन रेती गोकुल के नाम से जाना जाता है । यह वृंदावन से क़रीब 4o किमी की दूरी पर है ।

