रूपकी रासि किशोरी मोहनी मन हर्यो ।
चंचल दृष्टि कटाच्छ बान सों, हियर बेधि कर्यो ।। [1]
प्रेम-विवस पिय तन सुधि भूली, ग्रीवा मुकुट ढर्यो ।
‘अलि किशोरी’ वंशी में राधा गुन अमल पर्यो ।। [2]
- श्री किशोरी अलि जी, अष्टयाम प्रथम (52)
रूप की राशि किशोरी श्री राधिका मन का हरण करने वाली हैं जिन्होंने अपनी चँचल दृष्टि के कटाक्ष के बाणों से प्रियतम [कृष्ण] का हृदय बेध दिया है । [1]
प्रेम विवश प्रियतम [कृष्ण] को अपने तन मन की सुधी भूल गयी, एवं उनकी ग्रीवा से मुकुट श्री प्रिया जी के चरणों में गिर गया है । श्री किशोरी अलि कहते हैं कि प्रियतम कृष्ण तो वंशी में केवल प्रेमपूर्वक श्री राधा का गुणगान ही करते हैं । [2]
चंचल दृष्टि कटाच्छ बान सों, हियर बेधि कर्यो ।। [1]
प्रेम-विवस पिय तन सुधि भूली, ग्रीवा मुकुट ढर्यो ।
‘अलि किशोरी’ वंशी में राधा गुन अमल पर्यो ।। [2]
- श्री किशोरी अलि जी, अष्टयाम प्रथम (52)
रूप की राशि किशोरी श्री राधिका मन का हरण करने वाली हैं जिन्होंने अपनी चँचल दृष्टि के कटाक्ष के बाणों से प्रियतम [कृष्ण] का हृदय बेध दिया है । [1]
प्रेम विवश प्रियतम [कृष्ण] को अपने तन मन की सुधी भूल गयी, एवं उनकी ग्रीवा से मुकुट श्री प्रिया जी के चरणों में गिर गया है । श्री किशोरी अलि कहते हैं कि प्रियतम कृष्ण तो वंशी में केवल प्रेमपूर्वक श्री राधा का गुणगान ही करते हैं । [2]

