(राग विलावल)
श्री नवनागरी प्यारी यश तुम्हारौ मोहि भावै ।
बिहारिन लाड़ली यह यश आपही श्री मुख गावै ।। [1]
गावे जु श्री मुख सुयस तुम्हारौ तूही तन मन रम रही ।
तू ही धन तू ही प्राँण जीवन सपथ दे मोसों कही ।। [2]
करौ विविध विहार भामिन एतो गहरु न कीजिए ।
‘विष्णुदास’ विचित्र जोरी लोचनन सुख दीजिए ।। [3]
- श्री विष्णुदास जी
हे नवनागरी प्यारी [राधिका], तुम्हारा यशोगान मुझे बहुत भाता है । हे नित्य बिहारिनी, श्री लाड़िली जी! भगवान श्री कृष्ण स्वयं आपका ही यश अपने मुख से गाते हैं । [1]
श्री श्याम सुंदर स्वयं कहते हैं कि तुम ही उनके तन और मन में समायी हो । वह शपथ खाकर मुझे कह रहे हैं कि तुम ही उनका सम्पूर्ण धन, एवं प्राण हो । [2]
हे भामिनी, आप अपना मान त्याग कर श्याम सुंदर संग विविध प्रकार से विहार आरम्भ करो । श्री विष्णु दास कहते हैं कि हे श्री राधे, तुम्हारी और श्याम सुंदर की विचित्र जोड़ी है, कृपा करके आप दोनो एक संग रहिए जिससे हमारी आँखों को भी सुख प्रदान कीजिए । [3]
श्री नवनागरी प्यारी यश तुम्हारौ मोहि भावै ।
बिहारिन लाड़ली यह यश आपही श्री मुख गावै ।। [1]
गावे जु श्री मुख सुयस तुम्हारौ तूही तन मन रम रही ।
तू ही धन तू ही प्राँण जीवन सपथ दे मोसों कही ।। [2]
करौ विविध विहार भामिन एतो गहरु न कीजिए ।
‘विष्णुदास’ विचित्र जोरी लोचनन सुख दीजिए ।। [3]
- श्री विष्णुदास जी
हे नवनागरी प्यारी [राधिका], तुम्हारा यशोगान मुझे बहुत भाता है । हे नित्य बिहारिनी, श्री लाड़िली जी! भगवान श्री कृष्ण स्वयं आपका ही यश अपने मुख से गाते हैं । [1]
श्री श्याम सुंदर स्वयं कहते हैं कि तुम ही उनके तन और मन में समायी हो । वह शपथ खाकर मुझे कह रहे हैं कि तुम ही उनका सम्पूर्ण धन, एवं प्राण हो । [2]
हे भामिनी, आप अपना मान त्याग कर श्याम सुंदर संग विविध प्रकार से विहार आरम्भ करो । श्री विष्णु दास कहते हैं कि हे श्री राधे, तुम्हारी और श्याम सुंदर की विचित्र जोड़ी है, कृपा करके आप दोनो एक संग रहिए जिससे हमारी आँखों को भी सुख प्रदान कीजिए । [3]

