प्रेम सहित गदगद गिरा, कढ़त न मुखसों बात - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (163)

प्रेम सहित गदगद गिरा, कढ़त न मुखसों बात - श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (163)

प्रेम सहित गदगद गिरा, कढ़त न मुखसों बात ।
नारायण महबूब बिन, और न कछु सुहात ॥

- श्री नारायण स्वामी, अनुराग रस (163)

जब भक्त का हृदय प्रेम से भर जाता है, तब उसकी वाणी गद्गद हो जाती है और मुख से शब्द भी नहीं निकलते। उस समय उसे अपने प्रियतम के अतिरिक्त और कुछ नहीं सुहाता।