(सवैया)
रोज न आइए जो मनमोहन, तो यह नेंकु मतो सुनि लीजै। [1]
नैन हमारे तुम्हारे भये बस, जो बिन देखे कहो किमि जीजै॥ [2]
'ठाकुर' लाल पियारे सुनो, विनती इतनी पै अहो चित दीजै। [3]
दूसरे तीसरे पांचवें सातवें, आठवें तो भला आइवो कीजै॥ [4]
- श्री ठाकुर जी
हे मनमोहन श्री बाँके बिहारी! यदि आप प्रतिदिन न आ सकें, तो कृपा करके हमारी विनती स्वीकार करें। [1]
रोज न आइए जो मनमोहन, तो यह नेंकु मतो सुनि लीजै। [1]
नैन हमारे तुम्हारे भये बस, जो बिन देखे कहो किमि जीजै॥ [2]
'ठाकुर' लाल पियारे सुनो, विनती इतनी पै अहो चित दीजै। [3]
दूसरे तीसरे पांचवें सातवें, आठवें तो भला आइवो कीजै॥ [4]
- श्री ठाकुर जी
हे मनमोहन श्री बाँके बिहारी! यदि आप प्रतिदिन न आ सकें, तो कृपा करके हमारी विनती स्वीकार करें। [1]
अब हमारे नेत्र आपके हो चुके हैं, आपको देखे बिना हम कैसे जीवित रह पाएँगे? [2]
हे प्यारे ठाकुर, हमारी इस विनती पर कृपादृष्टि डालिए। [3]
यदि प्रतिदिन नहीं आ सकते, तो कम से कम हर दूसरे, तीसरे, पांचवें, सातवें या आठवें दिन आ जाओ। [4]

