प्रातर्नमामि वृषभानुसुतापदाब्जं नेत्रालिभिः परिणुतं व्रजसुन्दरीणाम् ।
प्रेमातुरेण हरिणां सुविशारदेन श्रीमद्व्रजेशतनयेन सदाऽभिवन्द्यम् ।।
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्तोत्र (8)
भम्रर रूपी व्रजगोपियों के नेत्र समूह जिनकी स्तुति करते हैं और परम चतुर प्रेमाकुल नन्दनन्दन श्रीहरि जिनकी सदा वन्दना करते हैं, ऐसे श्रीवृषभानुसता श्री राधिकाजी के उन चरण कमलों को मैं प्रातः काल नमन करता हूँ ।
प्रेमातुरेण हरिणां सुविशारदेन श्रीमद्व्रजेशतनयेन सदाऽभिवन्द्यम् ।।
- जगद्गुरु आद्यनिम्बार्काचार्य, प्रात: स्मरण स्तोत्र (8)
भम्रर रूपी व्रजगोपियों के नेत्र समूह जिनकी स्तुति करते हैं और परम चतुर प्रेमाकुल नन्दनन्दन श्रीहरि जिनकी सदा वन्दना करते हैं, ऐसे श्रीवृषभानुसता श्री राधिकाजी के उन चरण कमलों को मैं प्रातः काल नमन करता हूँ ।

