कमल सी अखियाँ लाल तिहारी - श्री विट्ठल दास

कमल सी अखियाँ लाल तिहारी - श्री विट्ठल दास

(राग ललित)
कमल सी अखियाँ लाल तिहारी।
तिन सो तक तक तीर चलावत वेधत छतियाँ हमारी ।। [1]
इन्हें कहा कोऊ दोष लगावत ये अजहूँ न संभारी।
श्रीविठ्ठल गिरिधारी कृपानिधि सुरत होते सुख कारी ।। [2]

- श्री विट्ठल दास

हे श्री कृष्ण! आपके कमल नयन लाल हो गई हैं, जिनकी तिरछी निगाहें तीर के समान मेरे हृदय को भेदने वाली हैं । [1]

उनका भी दोष नहीं क्यूँकि आज वो सम्भाले नहीं सम्भल रही । श्री विट्ठल दास कहते हैं, "गिरिराज धारण करने वाले प्रभु श्री कृष्ण कृपा निधि हैं एवं सब प्रकार से सुख कारी हैं ।" [2]