सखीवृंदवृता राधा रराज वर गह्वरे ।
तारागणैः संपरीतः शारदेंदुरिवांवरे ॥
- श्री वृषभानुपुर शतक (75), श्री वंशी अली द्वारा रचित
परम रमणीय गह्वरवन में सखी-समूह से आवृत श्रीराधा ठीक उसी प्रकार सुशोभित हो रही हैं, जैसे तारागणों से आवृत (घिरा हुआ) शरद् ऋतु का पूर्ण चन्द्र आकाश में सुशोभित होता है ।
तारागणैः संपरीतः शारदेंदुरिवांवरे ॥
- श्री वृषभानुपुर शतक (75), श्री वंशी अली द्वारा रचित
परम रमणीय गह्वरवन में सखी-समूह से आवृत श्रीराधा ठीक उसी प्रकार सुशोभित हो रही हैं, जैसे तारागणों से आवृत (घिरा हुआ) शरद् ऋतु का पूर्ण चन्द्र आकाश में सुशोभित होता है ।

