चलिये छबीली छबीलौ बोलत - श्री स्वामी हरिदास, केलीमाल (69)

चलिये छबीली छबीलौ बोलत - श्री स्वामी हरिदास, केलीमाल (69)

(राग सारंग)
चलिये छबीली छबीलौ बोलत ।
आजु की बानिक पर तृन टूटत है
कही न जाय कछु स्याम तोहिं रत ।। [1]
सखी लै चली मनाय जयौं हित की आई घत ।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा बीच ही आई मिलै
तन की सुबास सकल भँवर कलमत ।। [2]

- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (69)

सखी कहती है: हे छबीली जी [श्री राधिका] चलिए मेरे संग, छबीलौ [श्याम सुंदर] आपको बुला रहे हैं । श्री श्याम सुंदर की आज की बानिक पर तृण टूटत है अर्थात आज की उनकी छवि इतनी सुंदर है कि सब कुछ नयौछावर करने योग्य है, जो कहने में नहीं आ रही है , वह तो आप में अनुरक्त होकर चुप बैठे आपका ही का ध्यान कर रहे हैं । [1]

सखी ने श्री प्रिया जी को मना लिया और अपने संग ले चली मानो सखी ने दोनों के हित को देखते हुए श्री श्यामा श्याम को प्रेम के बंधन से जोड़ दिया । जैसे ही सखी प्रिया जी को लेकर चली तो श्री लाड़िली जी की परम दिव्य सुगंध से भ्रमर उड़ उड़ कर श्री श्यामा ज़ू की तरफ़ आने लगे । उन भ्रमरों को देख कर श्री श्याम सुंदर समझ गए कि हमारी प्रिया जी की सवारी आ रही है, तो उन भ्रमरों के संग एक और भ्रमर श्याम सुंदर भी चल पड़े श्यामा ज़ू की ओर । श्री हरिदास के स्वामी श्यामा ज़ू से आकर श्याम सुंदर बीच में ही मिल गए । [2]