राधादास्यमपास्य यः प्रयतते - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (79)

राधादास्यमपास्य यः प्रयतते - श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (79)

राधादास्यमपास्य यः प्रयतते गोविन्दसंगाशया सोयं पूर्णसुधारुचेः परिचयं राकां विना कांक्षति ।
किं च श्याम रति प्रवाहलहरीबीजं न ये तां विदुः स्ते प्राप्यापि महामृताम्बुधिमहो बिन्दुं परं प्राप्नुयुः ॥

- श्री हित हरिवंश महाप्रभु, श्री राधा सुधा निधि (79)

‘श्रीराधा’ के कैंकर्य को छोड़कर जो गोविन्द के संग की चेष्टा करते हैं, वे बिना पूर्णिमा तिथि के पूर्णचन्द्र प्राप्त करना चाहते हैं। कृष्णप्रेम प्रवाह की लहरों का बीज 'श्रीराधा' को न जानने से महान अमृत के सागर को पाकर भी एक बूँद ही पा सकेंगे।