श्रीवृंदाविपुन विहार निजु, श्रीस्वामी कौ रूप ।
गौर-स्याम हिरदै दोऊ, बिहरैं केलि अनूप ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (443)
श्री वृन्दावन का नित्य-विहार ही श्री स्वामी हरिदासजी महाराज का अपना निज-स्वरूप है, क्योंकि इनके हृदय में श्री गौर-श्याम स्वरूप युगल नित्य अनुपम केलि करते रहते हैं।
गौर-स्याम हिरदै दोऊ, बिहरैं केलि अनूप ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (443)
श्री वृन्दावन का नित्य-विहार ही श्री स्वामी हरिदासजी महाराज का अपना निज-स्वरूप है, क्योंकि इनके हृदय में श्री गौर-श्याम स्वरूप युगल नित्य अनुपम केलि करते रहते हैं।

