करुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (51)

करुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ - श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (51)

करुना सिंधु दयाल हो, बाँके विरदनि नाथ ।
कब कृपा कर राखि हो, निसि दिन अपने साथ ॥

- श्री रूप सखी, सिद्धांत के दोहा (51)

हे बाँके बिहारी! जग में आप करुणा-सिंधु एवं दीनों के नाथ कहाते हो, ऐसी कब कृपा होगी कि आप मुझे निशि-दिन अपने साथ ही रखेंगे?