कवास ! कवास ! हो स्वामिनी, महाबहु सुख रासि ।
सरणागत प्रतिपाल कैं, पुजवौ मन की आस ॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (6)
हे स्वामिनी! हे परम सुख की राशि! आप मेरी रक्षा करें, रक्षा करें। आप शरणागत का पालन करने वाली हैं, अतः मेरे मन की जो अभिलाषा है, उसे पूर्ण कीजिए।
सरणागत प्रतिपाल कैं, पुजवौ मन की आस ॥
- श्री अलबेली अलि, विनय कुंडलियाँ (6)
हे स्वामिनी! हे परम सुख की राशि! आप मेरी रक्षा करें, रक्षा करें। आप शरणागत का पालन करने वाली हैं, अतः मेरे मन की जो अभिलाषा है, उसे पूर्ण कीजिए।

