(राग ललित ख़्याल)
जय राधा, जय राधा, जय राधा जय जय जय राधा।
जय राधा, जय राधा, जय राधा जय जय जय राधा।
गौरांगी नीलाम्बर भूषित भूषन ज्योति अगाधा॥ [1]
सहचरि संगी स्याम धामिनी पुरवनि मन की साधा।
श्री रसिक बिहारिनि कृपा निहारनि पीताम्बर आराधा॥ [2]
- श्री पीताम्बर देव जी, श्री पीताम्बर देव जू की वाणी (20)
श्री राधा की जय हो, श्री राधा की जय हो। गौर वर्ण श्री राधिका नीलाम्बर से सुशोभित हैं जिनके आभूषणों की दीप्ति अगाध है। [1]
सहचरियों के मध्य में विराजमान, श्याम सुंदर के संग नित्य श्री धाम वृंदावन में विराजित, श्री पीताम्बर देव की आराध्या, हे रसिक विहारिणी श्री राधा, मुझ पर अपनी कृपा दृष्टि से निहार कर मेरे मन की आशा को पूर्ण कीजिए । [2]

