यद्यप्यानन्द साम्राज्यं - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (57)

यद्यप्यानन्द साम्राज्यं - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (57)

यद्यप्यानन्द साम्राज्यं सर्वलीला कृतिष्वपि ।
तथापि लेशमात्रं ते त्वद्वक्षोरुह भूषणे ।।

- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (57)

[ हे स्वामिनि राधे ! ] यद्यपि श्याम-सुन्दर श्रीकृष्ण समस्त लीलावतारों के शिरोभूषण और श्रानन्द-साम्राज्य की पराकाष्ठा हैं  फिर भी वे सर्वेश्वर आपके आपकी प्रभा के समक्ष अत्यन्त लघु (लेश मात्र) से प्रतीत होते हैं ।