(राग सारंग)
तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल। [1]
जिहिं गुन सर्बसु चोरि लियौ नागरि,
ते गुन अब प्रतिपाल॥ [2]
तैं कछु प्रेम-ठगौरी मेली,
तुव मुख जोवत नैंन बिसाल। [3]
भाँमिनि कनक लता ह्वै लपटी,
श्रीबीठल विपुल उर स्याम तमाल॥ [4]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (18)
श्री विठ्ठल विपुल देव जी अपने सहचरी स्वरुप में स्थित श्री प्रियाजी से कहती हैं कि "हे प्यारी ! आपने हमारे लाल को मोहित कर रखा है।" [1]
जिन प्रेममयी विशेषताओं से प्रभावित करके आपने लाल का सर्वस्व हरण कर लिया है, उन्हीं गुणों से आप अब भी प्रियतम का प्रतिपालन करें। [2]
आपने लाल पर कुछ ऐसा प्रेम का जादू कर दिया है कि अपने बड़े-बड़े नयनों से वे आपके मुखचन्द्र को निहारते रहते हैं। [3]
सखी के इन प्रिय वचनों को सुनकर भामिनी प्रिया कनकवल्लरी होकर तमाल रूपी श्याम के साथ एकाकार हो गईं। [4]
तें मोह्यौ प्यारी मेरौ लाल। [1]
जिहिं गुन सर्बसु चोरि लियौ नागरि,
ते गुन अब प्रतिपाल॥ [2]
तैं कछु प्रेम-ठगौरी मेली,
तुव मुख जोवत नैंन बिसाल। [3]
भाँमिनि कनक लता ह्वै लपटी,
श्रीबीठल विपुल उर स्याम तमाल॥ [4]
- श्री विठ्ठल विपुल देव जी, विट्ठल विपुल देव जू की बानी (18)
श्री विठ्ठल विपुल देव जी अपने सहचरी स्वरुप में स्थित श्री प्रियाजी से कहती हैं कि "हे प्यारी ! आपने हमारे लाल को मोहित कर रखा है।" [1]
जिन प्रेममयी विशेषताओं से प्रभावित करके आपने लाल का सर्वस्व हरण कर लिया है, उन्हीं गुणों से आप अब भी प्रियतम का प्रतिपालन करें। [2]
आपने लाल पर कुछ ऐसा प्रेम का जादू कर दिया है कि अपने बड़े-बड़े नयनों से वे आपके मुखचन्द्र को निहारते रहते हैं। [3]
सखी के इन प्रिय वचनों को सुनकर भामिनी प्रिया कनकवल्लरी होकर तमाल रूपी श्याम के साथ एकाकार हो गईं। [4]

