अब लियौ अब लियौ अब लियौ रे - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19)

अब लियौ अब लियौ अब लियौ रे - श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19)

अब लियौ अब लियौ अब लियौ रे, ऐसी जो जिय होय ।
श्रीवृन्दावन में पैंडहूँ, पल मति बिछुरौ कोय ॥

- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19)

मन में हर समय यही भावना रखो कि श्री वृन्दावन अब इसी क्षण मुझ पर कृपा कर मुझे अपने भीतर ले लेंगे और श्यामा-श्याम की नित्य-लीला में सम्मिलित कर देंगे। ऐसी बात मन में रखकर ही श्री वृन्दावन जू में नित्य पड़े रहो एवं एक पलमात्र के लिए भी मत बिछड़ो।