सेवत ललितादिक सखि, जे प्रिय परम प्रवीन।
कोटि कोटि छबि आगरी, सुर मुनि बरनन कीन ॥
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
परम प्रवीण ललितादिक सखियों द्वारा जो नित्य प्रेमपूर्वक सेवित हैं, वे श्री राधा कोटि-कोटि सुंदरता की खान हैं, जिनका वर्णन सुर, मुनि इत्यादि भी करते रहते हैं।
कोटि कोटि छबि आगरी, सुर मुनि बरनन कीन ॥
- श्री हठी जी, श्री राधा सुधा शतक (8)
परम प्रवीण ललितादिक सखियों द्वारा जो नित्य प्रेमपूर्वक सेवित हैं, वे श्री राधा कोटि-कोटि सुंदरता की खान हैं, जिनका वर्णन सुर, मुनि इत्यादि भी करते रहते हैं।

