छबि आछी बनबारी की।
मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल अलिका घूंघर बारी की॥ [1]
मृदु मुसिक्यान आन नयनन की को बरनौ गिरिधारी की।
कृष्णदास जुगलजोरी पर तन मन धन सब बारी की॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी
जिनके सिर पर मोर मुकुट विराजमान है, कानों में मकराकृत कुण्डल सुशोभित है और अलकें घुंघराली हैं, उन श्री कृष्ण की छबि बड़ी सुन्दर है। [1]
श्री कृष्णदास जी कहते हैं "जिनके मुख पर मृदु मुसकान है, नयन कमल की सुंदरता अवर्णनीय है, संग में श्री राधिका जी विराजमान हैं, ऐसी युगल जोड़ी श्री श्यामाश्याम पर तो तन, मन, प्राण सब न्योंछावर है।" [2]
मोर मुकुट मकराकृत कुण्डल अलिका घूंघर बारी की॥ [1]
मृदु मुसिक्यान आन नयनन की को बरनौ गिरिधारी की।
कृष्णदास जुगलजोरी पर तन मन धन सब बारी की॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी
जिनके सिर पर मोर मुकुट विराजमान है, कानों में मकराकृत कुण्डल सुशोभित है और अलकें घुंघराली हैं, उन श्री कृष्ण की छबि बड़ी सुन्दर है। [1]
श्री कृष्णदास जी कहते हैं "जिनके मुख पर मृदु मुसकान है, नयन कमल की सुंदरता अवर्णनीय है, संग में श्री राधिका जी विराजमान हैं, ऐसी युगल जोड़ी श्री श्यामाश्याम पर तो तन, मन, प्राण सब न्योंछावर है।" [2]

