काम क्रोध मद लोभ कहँ, मन मूरख मत छोड़ ।
रसिक शिरोमणि श्याम ढींग, दे इनको मुख मोड़ ॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (38)
हे मूर्ख मन! काम, क्रोध, मद और लोभ को केवल दबाने का प्रयास मत कर; इन्हें श्यामसुन्दर की ओर मोड़ दे। यदि इच्छा करनी है तो उनके सुख की इच्छा कर, यदि क्रोध करना है तो अपनी उन कमियों पर कर जो तुझे उनसे दूर करती हैं, और यदि गर्व करना है तो इस पर कर कि मैं श्यामसुन्दर का हूँ।
रसिक शिरोमणि श्याम ढींग, दे इनको मुख मोड़ ॥
- जगद्गुरु कृपालु जी महाराज, भक्ति शतक (38)
हे मूर्ख मन! काम, क्रोध, मद और लोभ को केवल दबाने का प्रयास मत कर; इन्हें श्यामसुन्दर की ओर मोड़ दे। यदि इच्छा करनी है तो उनके सुख की इच्छा कर, यदि क्रोध करना है तो अपनी उन कमियों पर कर जो तुझे उनसे दूर करती हैं, और यदि गर्व करना है तो इस पर कर कि मैं श्यामसुन्दर का हूँ।

