सोवत जागत रैन दिन, चलत फिरत सुष होत ।
जुगल रूप गुन नाम रस, वहत चहूँ दिसि सोत ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (11)
श्री धाम वृंदावन में चाहे सो रहे हों या जाग रहे हों, रात हो या दिन, चलते-फिरते हर समय केवल रस ही रस अनुभव होता है। कारण यह है कि श्री राधा-कृष्ण के रूप, गुण और नाम का रस चारों दिशाओं में निरंतर प्रवाहित हो रहा है।
जुगल रूप गुन नाम रस, वहत चहूँ दिसि सोत ॥
- श्री प्रियादास जी, रसिक मोहिनी (11)
श्री धाम वृंदावन में चाहे सो रहे हों या जाग रहे हों, रात हो या दिन, चलते-फिरते हर समय केवल रस ही रस अनुभव होता है। कारण यह है कि श्री राधा-कृष्ण के रूप, गुण और नाम का रस चारों दिशाओं में निरंतर प्रवाहित हो रहा है।

