भटू सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन - श्री रसखान

भटू सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन - श्री रसखान

भटू सुन्दर स्याम सिरोमनि मोहन जोहन में चित्त चोरत है ।
अवलोकन बंक बिलोचन में ब्रजबालन के दृग जोरत है ।। [1]
रसखानि महावत रूप सलोने को मारग तें मन मोरत है ।
गृह काज समाज सबै कुल लाज लला ब्रजराज को तोरत है ।। [2]

- श्री रसखान, रसखान रत्नावली

एक सखी दूसरी सखी से कहती है- हे सखि! सुंदर व शिरोमणि कृष्ण मन मोहक है तथा नजर पड़ते ही वह मन को अपने वश में कर लेता है। वह अपने तिरछे नयनों से ब्रज-बालाओं के नयनों को सम्मोहित कर लेता है। [1] 

रसखान कहते हैं कि श्याम सुंदर का जो रूप-सौंदर्य रूपी महावत है, वह गोपियों के मन रूपी हाथी को कहीं से भी पकड़कर अपने वश में कर लेता है। वह कृष्ण घरेलू कार्यों, समाज के रीति-रिवाज और कुल खानदान की मर्यादा को भुलाने पर ब्रजबालाओं को मजबूर कर देता है। [2]