खड़ी छड़ी ले राधिका प्रिय - ब्रज के दोहे

खड़ी छड़ी ले राधिका प्रिय - ब्रज के दोहे

खड़ी छड़ी ले राधिका, प्रिय को नृत्य सिखात।
मंथर गति जब ही बनि, डर सो थर थर्रात॥

- ब्रज के दोहे

श्री राधिका हाथ में छड़ी लेकर श्री श्यामसुन्दर को नृत्य सिखा रही हैं। जब भी श्यामसुन्दर की चाल थोड़ी मंथर हो जाती है, तब वे डर के मारे थर-थर काँपने लगते हैं कि कहीं श्री राधा रानी उन्हें छड़ी से दण्ड न दे दें।