श्रीराधा अब देहु मोहि, तव पद रज अनुराग ।
जातें इह पर भोग में, होय उदय बैराग॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (14.1)
हे श्री राधा! ऐसी कृपा कीजिए कि मेरे हृदय में आपके श्रीचरणों की रज के प्रति सच्चा अनुराग उत्पन्न हो जाए। तब इस मिथ्या संसार के भोगों के प्रति स्वतः ही वैराग्य जागृत हो जाएगा।
जातें इह पर भोग में, होय उदय बैराग॥
- श्री हनुमान प्रसाद पोद्दार (भाईजी), पद रत्नाकर, वंदना एवं प्रार्थना (14.1)
हे श्री राधा! ऐसी कृपा कीजिए कि मेरे हृदय में आपके श्रीचरणों की रज के प्रति सच्चा अनुराग उत्पन्न हो जाए। तब इस मिथ्या संसार के भोगों के प्रति स्वतः ही वैराग्य जागृत हो जाएगा।

