नव निकुंज मन कौ अगम, सेवत कोटि अनंग।
युगल केलि आनंद कौ, तहाँ अखंडित रंग॥
- ब्रज के दोहे
नव-निकुंज का वह दिव्य रस, जो सामान्य मन के लिए अगम्य है और जिसे कोटि-कोटि कामदेव भी सेवा करते हैं, जहाँ निरंतर प्रेम-रंग बरसता रहता है—वही वास्तव में युगल-केलि का परमानंद है।
युगल केलि आनंद कौ, तहाँ अखंडित रंग॥
- ब्रज के दोहे
नव-निकुंज का वह दिव्य रस, जो सामान्य मन के लिए अगम्य है और जिसे कोटि-कोटि कामदेव भी सेवा करते हैं, जहाँ निरंतर प्रेम-रंग बरसता रहता है—वही वास्तव में युगल-केलि का परमानंद है।

