तब सखियन पिय सौ कह्यौ, सुनहुँ रसिकवर राइ।
जो रस चाहत आपनौ, गहौ कुँवरि के पाँइ॥
- ब्रज के दोहे
एक सखी श्री श्यामसुन्दर से कहती है कि अहो रसिकवर जू! यहाँ आपकी एक न चलेगी। यदि कुछ रस प्राप्त करने की इच्छा हो तो हमारी श्री प्रिया जू के चरणों को पकड़ लो।
जो रस चाहत आपनौ, गहौ कुँवरि के पाँइ॥
- ब्रज के दोहे
एक सखी श्री श्यामसुन्दर से कहती है कि अहो रसिकवर जू! यहाँ आपकी एक न चलेगी। यदि कुछ रस प्राप्त करने की इच्छा हो तो हमारी श्री प्रिया जू के चरणों को पकड़ लो।

