बनत नांही यमुना जी को नहिबो ।
सुन्दर श्याम घाट पै ठाड़े, कठिन भयो घर जैवो ।। [1]
जो प्रभु हमते एसी करोगे, तो या घाट न अइवो ।
श्री विठ्ठल गिरिधरन लाल सों, विनती कर घर जैवो ।। [2]
- श्री विट्ठल दास
एक ब्रजांगना कहती है कि श्री यमुना जी में स्नान बन नहीं पायगा क्यूँकि श्यामसुंदर घाट पर खड़े मिलते हैं और हास्य विनोद करने लगते हैं, फिर घर जाना कठिन हो जाता है । [1]
वह बोली प्रभु यदि आप ऐसी करोगे तो हम यमुना घाट पर आएँगे ही नहीं । श्री विट्ठल दास जी कहते हैं कि सखी तू गिरिधर लाल से विनती कर, तुझे वह अवश्य घर जाने देंगें । [2]
सुन्दर श्याम घाट पै ठाड़े, कठिन भयो घर जैवो ।। [1]
जो प्रभु हमते एसी करोगे, तो या घाट न अइवो ।
श्री विठ्ठल गिरिधरन लाल सों, विनती कर घर जैवो ।। [2]
- श्री विट्ठल दास
एक ब्रजांगना कहती है कि श्री यमुना जी में स्नान बन नहीं पायगा क्यूँकि श्यामसुंदर घाट पर खड़े मिलते हैं और हास्य विनोद करने लगते हैं, फिर घर जाना कठिन हो जाता है । [1]
वह बोली प्रभु यदि आप ऐसी करोगे तो हम यमुना घाट पर आएँगे ही नहीं । श्री विट्ठल दास जी कहते हैं कि सखी तू गिरिधर लाल से विनती कर, तुझे वह अवश्य घर जाने देंगें । [2]

