निंदा बिंदा भै नहीं, भली कहौ किनि कोई ।
श्री बिहारीदास ब्रत भाँवती, जीवत हैं मुख जोई ।।
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (182)
नित्य-विहार के अनन्य उपासक श्री बिहारिन देव जी महाराज का मनभावन दृढ़ व्रत ऐसा है कि अपनी प्राण-जीवन स्वरूप श्री नित्य-विहारिणी जू (श्रीराधा) के श्रीमुख-चन्द्र को देखकर ही सतत जीना है। कोई चाहे निंदा करे या स्तुति करे, भली कहे या बुरा कहे—इन बातों पर ध्यान ही नहीं देना है।
श्री बिहारीदास ब्रत भाँवती, जीवत हैं मुख जोई ।।
- श्री बिहारिन देव - बिहारिन देव जी की वाणी, सिद्धान्त की साखी (182)
नित्य-विहार के अनन्य उपासक श्री बिहारिन देव जी महाराज का मनभावन दृढ़ व्रत ऐसा है कि अपनी प्राण-जीवन स्वरूप श्री नित्य-विहारिणी जू (श्रीराधा) के श्रीमुख-चन्द्र को देखकर ही सतत जीना है। कोई चाहे निंदा करे या स्तुति करे, भली कहे या बुरा कहे—इन बातों पर ध्यान ही नहीं देना है।

