सजनी नव निकुंज सु केलि - श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (180)

सजनी नव निकुंज सु केलि - श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (180)

(राग बसंत)
सजनी नव निकुंज सु केलि ।
गौर-श्याम तमाल लपटी, सरस आनन्द बेलि ।। [1]
निरखि हरषित रसिक मोहन, पान कृत रस झेलि ।
जैश्रीकमलनैंन हित छिन छिन बिहरत, भुजा कंठ सु मेलि ।। [2]

- श्री हित कमलनैन, श्री हित कमलनैन जी की वाणी, अष्टायामी पदावली (180)

हे सखी, श्री प्रिया प्रियतम की नव निकुंज की केलि परम अद्बुत है । गौर वर्ण श्री राधिका श्याम वर्ण श्री कृष्ण से ऐसे आनंद से लिपटी हैं मानों तमाल वृक्ष से बेलि लिपटी हुई रहती हैं । [1]

जिसको निहार निहार कर रसिक जन हर्षित होते हैं एवं श्री मोहन लाल रस पान कर रसानंद से भर जाते हैं । श्री हित कमल नैंन जी कहते हैं कि यह दिव्य जोड़ी छिन छिन प्रेम में उन्मत्त हो कर आलिंगन कर नित्य विहार करते हैं । [2]