श्याम सघन घन घेरि के रस बरस्यो रसखानि - श्री रसखान, रसखान रत्नावली

श्याम सघन घन घेरि के रस बरस्यो रसखानि - श्री रसखान, रसखान रत्नावली

श्याम सघन घन घेरि के, रस बरस्यो रसखानि।
भई दिवानी पान करि, प्रेम मद्य मनमानि॥

- श्री रसखान, रसखान रत्नावली

श्री श्यामसुन्दर रूपी सघन मेघों ने चारों ओर से घेरकर रसमय प्रेम की वर्षा की है। रसखान कहते हैं कि जिसने भी इस दिव्य प्रेम-मदिरा का पान किया, वह उस प्रेम में दीवानी हो गई।