ललिता बिनु क्यों राधा पैयेयै ।
कुँवरि प्रान जीवन बिनु, राधा रस कैसैं दुलरैयै ।। [1]
जाकी सुजस सुरस सलिता बिनु, कैसैं कै भव ताप मिटैयै ।
जाकौ नाम कुँवरि वंशी रस बिन गायैं कैसैं कै अघैयै ।। [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (40)
श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि श्री ललिता सखी की कृपा के बिना श्री राधा को कोई प्राप्त कैसे कर सकता है ?
कुँवरि किशोरी [श्री राधा रानी] की प्राण जीवन ललिता के बिना कोई राधा रस को कैसे दुलरा सकता है ? [1]
उनके सुजस व सुंदर रस की सलिता के बिना कोई भव ताप कैसे मिटा सकता है ? श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि जिसका नाम ही कुँवरि [श्री राधा] की वंशी का रस है, उसके गान किए बिना तृप्ति कैसे मिल सकती है । [2]
कुँवरि प्रान जीवन बिनु, राधा रस कैसैं दुलरैयै ।। [1]
जाकी सुजस सुरस सलिता बिनु, कैसैं कै भव ताप मिटैयै ।
जाकौ नाम कुँवरि वंशी रस बिन गायैं कैसैं कै अघैयै ।। [2]
- श्री वंशी अलि, सिद्धांत के पद (40)
श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि श्री ललिता सखी की कृपा के बिना श्री राधा को कोई प्राप्त कैसे कर सकता है ?
कुँवरि किशोरी [श्री राधा रानी] की प्राण जीवन ललिता के बिना कोई राधा रस को कैसे दुलरा सकता है ? [1]
उनके सुजस व सुंदर रस की सलिता के बिना कोई भव ताप कैसे मिटा सकता है ? श्री वंशी अलि जी कहते हैं कि जिसका नाम ही कुँवरि [श्री राधा] की वंशी का रस है, उसके गान किए बिना तृप्ति कैसे मिल सकती है । [2]

