धन धन वृन्दावन की डुकरियाँ  - श्री अभयराम

धन धन वृन्दावन की डुकरियाँ - श्री अभयराम

धन धन वृन्दावन की डुकरियाँ ।
प्रातः होत जमुना को जावें, सुकरी जाँय सुकरियाँ ।। [1]
आसन  बासन  घर  में  नाहीं, नाहीं  हँडिया परियाँ ।
'अभयराम' ये हु बड़भागिनी, इनकी तैयार लकरियाँ ।। [2]

- श्री अभयराम, वृंदावन रहस्य विनोद (54)

धन्य धन्य हैं श्री वृन्दावन धाम की वे अकिंचन डुकरियाँ (अत्यंत वृद्ध महिलाऐं) जो प्रातःकाल होते ही ठंड में सिकुड़ती हुई भी नित्य जमुना स्नान करने जाती हैं। [1]

इनके घर मैं न तो बैठने को आसन हैं और न ही खाना बनाने को बर्तन, चूल्हा इत्यादि । श्री अभयराम जी कहते हैं की ये महिलायें बड़ी बड़भागी हैं क्यूँकि ऐसा लगता है कि बस इनका अंत समय निकट ही है [लकड़ियाँ तैयार ही हैं] और यह श्री वृंदावन धाम की कृपा सानिध्य में हैं । [2]