प्राननि तें प्यारो लगे, दंपति-सुजस-बखान ।
अधिकारी बिरलो अवनि, रुचे न रस बिन प्रान॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (72)
इस पृथ्वी पर कोई विरला ही ऐसा अधिकारी होगा, जिसे प्रिया-प्रियतम का रस अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय लगे, और जिसे युगल दम्पति श्री राधा-कृष्ण के इस अद्भुत यश का गान करने में ही प्राणों से बढ़कर सुख की अनुभूति होती हो।
अधिकारी बिरलो अवनि, रुचे न रस बिन प्रान॥
- श्री ब्रजनिधि जी, ब्रजनिधि ग्रंथावली, प्रीति लता (72)
इस पृथ्वी पर कोई विरला ही ऐसा अधिकारी होगा, जिसे प्रिया-प्रियतम का रस अपने प्राणों से भी अधिक प्रिय लगे, और जिसे युगल दम्पति श्री राधा-कृष्ण के इस अद्भुत यश का गान करने में ही प्राणों से बढ़कर सुख की अनुभूति होती हो।

