मम हिये आय बसहु प्रिय जोरी।
नन्दलाल जू रसिक शिरोमणि रासरसेश्वरी भानु-किशोरी ।। [1]
नैन सूँ नैन मेलि मुस्क्यावत करत मधुर बतियां रस बोरी ।
‘ललितविहारिणि’ चन्द्र बदन दोऊ चितवन कूँ रहें नैन चकोरी ।। [2]
- श्री ललित विहारिणी जी
श्री ललित विहरिणि जी युगल से प्रार्थना कर कहते हैं कि हे रसिक शिरोमणि श्री श्याम सुंदर एवं रास रासेश्वरी भानु नंदिनी श्री राधिका जी ऐसी कृपा करो कि आप दोनों की सुंदर जोड़ी मेरे हृदय में भी बस जावे । [1]
श्री ललित विहारिणी जी कहते हैं कि नैनों से नैंन मिला कर मुस्कुराने वाले, एवं मधुर मधुर बतियाँ कर रस बरसाने वाले इस युगल चंद्र की सुंदर चितवन को निहारने के लिए मेरे नैंन चकोरी की भाँति उतावले रहते हैं । [2]
नन्दलाल जू रसिक शिरोमणि रासरसेश्वरी भानु-किशोरी ।। [1]
नैन सूँ नैन मेलि मुस्क्यावत करत मधुर बतियां रस बोरी ।
‘ललितविहारिणि’ चन्द्र बदन दोऊ चितवन कूँ रहें नैन चकोरी ।। [2]
- श्री ललित विहारिणी जी
श्री ललित विहरिणि जी युगल से प्रार्थना कर कहते हैं कि हे रसिक शिरोमणि श्री श्याम सुंदर एवं रास रासेश्वरी भानु नंदिनी श्री राधिका जी ऐसी कृपा करो कि आप दोनों की सुंदर जोड़ी मेरे हृदय में भी बस जावे । [1]
श्री ललित विहारिणी जी कहते हैं कि नैनों से नैंन मिला कर मुस्कुराने वाले, एवं मधुर मधुर बतियाँ कर रस बरसाने वाले इस युगल चंद्र की सुंदर चितवन को निहारने के लिए मेरे नैंन चकोरी की भाँति उतावले रहते हैं । [2]

