ब्रज ठकुरानी राधिका, ठाकुर किए प्रकास ।
ते मन मोहन हरि भए, अब दासी के दास ॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (395)
ब्रज की ठकुरानी केवल श्री राधा महारानी हैं। उन्हीं की कृपा से श्री कृष्ण का यश जगत में प्रकाशित है। जो श्री हरि सबके मन को मोहने वाले हैं, वे यहाँ ब्रज में श्री राधा की दासियों के भी दास बने बैठे हैं।
ते मन मोहन हरि भए, अब दासी के दास ॥
- श्री मतिराम, मतिराम सतसई (395)
ब्रज की ठकुरानी केवल श्री राधा महारानी हैं। उन्हीं की कृपा से श्री कृष्ण का यश जगत में प्रकाशित है। जो श्री हरि सबके मन को मोहने वाले हैं, वे यहाँ ब्रज में श्री राधा की दासियों के भी दास बने बैठे हैं।

