(राग सोरठा)
श्री राधे अद्भुत नाम सुहायो ।
हरि हर विरंचि रटत है निरन्तर वेद पुराणन गायो ॥ [1]
नन्द को नन्दन ब्रज को चन्द्रमा सुनि के याहि लुभायो ।
‘किशोरीदास’ बृषभानुनंदिनी के चरण कमल चित्त लायौ ॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
अद्बुत “श्री राधे” नाम मुझे अति ही सुहाता है । "श्री राधे" नाम नित्य ही भगवान श्री हरि, शंकर एवं ब्रह्मा जी द्वारा रटन किया जाता है एवं वेद पुराण भी इसी नाम का गुणगान करते हैं । [1]
ब्रज चंद्र नंदनंदन श्री कृष्ण को भी “श्री राधे” नाम सुनने का ही लोभ रहता है । श्री किशोरीदास जी कहते हैं कि बृषभानु नंदनी श्री राधा महारानी की चरणों में ही उनका चित्त लगा हुआ है । [2]
श्री राधे अद्भुत नाम सुहायो ।
हरि हर विरंचि रटत है निरन्तर वेद पुराणन गायो ॥ [1]
नन्द को नन्दन ब्रज को चन्द्रमा सुनि के याहि लुभायो ।
‘किशोरीदास’ बृषभानुनंदिनी के चरण कमल चित्त लायौ ॥ [2]
- श्री किशोरीदास (गौड़ीय संत)
अद्बुत “श्री राधे” नाम मुझे अति ही सुहाता है । "श्री राधे" नाम नित्य ही भगवान श्री हरि, शंकर एवं ब्रह्मा जी द्वारा रटन किया जाता है एवं वेद पुराण भी इसी नाम का गुणगान करते हैं । [1]
ब्रज चंद्र नंदनंदन श्री कृष्ण को भी “श्री राधे” नाम सुनने का ही लोभ रहता है । श्री किशोरीदास जी कहते हैं कि बृषभानु नंदनी श्री राधा महारानी की चरणों में ही उनका चित्त लगा हुआ है । [2]

