ब्रज में रहौं आन नहिं जावौं, कृपा तिहारी पाऊँ - श्री सूरदास, सूरसागर

ब्रज में रहौं आन नहिं जावौं, कृपा तिहारी पाऊँ - श्री सूरदास, सूरसागर

ब्रज में रहौं आन नहिं जावौं, कृपा तिहारी पाऊँ ।
हौं तो जनम जनम कौ जाचक, ‘सूरदास’ मेरो नांउ॥

- श्री सूरदास, सूरसागर

हे प्रभु! मैं केवल ब्रज में ही रहूँ और कहीं अन्यत्र न जाऊँ, बस आपकी यही कृपा चाहता हूँ। मैं तो जन्म-जन्मों का याचक (भिखारी) हूँ और मेरा नाम 'सूरदास' है।