हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी  - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (37)

हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी - श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (37)

हा राधे स्वामिनि कदा किशोरी दिव्य रूपिणी ।
प्रेमैक रसमग्राहं भवेयं तव किंकरी ॥

- श्री हित कृष्ण चंद्र, श्री राधा उपसुधा निधि (37)

हा राधे ! हा स्वामिनि !! मैं कब दिव्य स्वरूपमयी, एक मात्र प्रेम-रस-मग्न किशोरी होकर आपकी किंकरी (दासी ) हो सकूँगी ?