सुन बरसाने वारी गुलाम तेरो बनवारी - श्री मोहनलाल जी

सुन बरसाने वारी गुलाम तेरो बनवारी - श्री मोहनलाल जी

सुन बरसाने वारी गुलाम तेरो बनवारी॥
रिद्ध सिद्ध चरनन में लोटे।
आस-पास फेरे बनवारी॥ [1]
बड़े-बड़े देव खड़े दर्शन कूँ।
चाकर कुञ्ज बिहारी॥ [2]
वृन्दावन के राजा होकर।
छाछ पे नाचे गिरधारी॥ [3]
मोहनलाल करे अब विनती।
बार - बार बलिहारी॥ [4]

- श्री मोहनलाल जी

हे बरसानेवारी [राधिका], सुनो! श्री कृष्ण तुम्हारे ग़ुलाम हैं !
रिद्धि और सिद्धि नित्य आपके चरणों में निवास करती हैं। श्री कृष्ण सदैव आपके समीप विचरण करते हैं। [1]

हे बरसानेवारी! तुम्हारे दर्शन के लिए बड़े-बड़े देव खड़े रहते हैं ! श्री कुंजबिहारी तुम्हारे चाकर हैं। [2]

भगवान कृष्ण ब्रज के राजा हैं, फिर भी वे केवल थोड़ी सी छाछ के लिए नृत्य करते हैं। [3]

श्री मोहनलाल अब कृपा की विनती कर स्वयं को बार-बार न्योछावर करता है। [4]